सब्र टूटा”: SDM कार्यालय घेरेंगे भूविस्थापित, कटघोरा में हाई अलर्ट! तहसीलों में ‘रिश्वत राज’ से उबल पड़ा गुस्सा, SECL और प्रशासन दोनों कटघरे में
सुशासन तिहार” पर ग्रामीणों का हमला — “यह सुशासन नहीं, खुला कुशासन”

South Eastern Coalfields Limited के अधिग्रहण और राजस्व कार्यालयों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आज कटघोरा में बड़ा विस्फोट होने जा रहा है। वर्षों से रोजगार, मुआवजा, पुनर्वास और दस्तावेजी त्रुटियों के लिए दफ्तर-दफ्तर भटक रहे भूविस्थापितों का सब्र अब टूट चुका है। ग्रामीणों ने 20 मई 2026 को SDM Office Katghora का घेराव करने का ऐलान कर दिया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि तहसील दीपका, दर्री, कटघोरा और जिला पुनर्वास शाखा में बिना रिश्वत कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती। रोजगार सत्यापन, वंश वृक्ष, फौती, ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार, राजस्व त्रुटि सुधार जैसे मामलों को महीनों नहीं बल्कि वर्षों तक लटकाकर रखा जाता है। आरोप यह भी है कि “पैसा दो तो काम होगा, नहीं तो फाइल गायब समझो।”

- “सुशासन तिहार” पर ग्रामीणों का हमला — “यह सुशासन नहीं, खुला कुशासन”
ग्रामीणों ने सीधे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर सवाल दाग दिए हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai द्वारा चलाए जा रहे “सुशासन तिहार” को तहसील कार्यालयों ने मजाक बना दिया है। भूविस्थापितों का आरोप है कि अफसरों में न शासन का डर है, न नेताओं का। यही वजह है कि रिश्वतखोरी खुलेआम चल रही है और शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती। ग्रामीणों का गुस्सा अब केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं, बल्कि सांसद-विधायकों की “चुप्पी” पर भी फूट पड़ा है।
अधिग्रहण के 10–15 साल बाद भी नहीं मिला रोजगार और मुआवजा

कुसमुंडा क्षेत्र में जटराज, पड़नियां, सोनपुरी, पाली, रिसदी, खोडरी, चुरैल, आमगांव, खैरभावना, गेवरा सहित कई गांवों का अधिग्रहण वर्षों पहले किया गया था। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आज तक कई परिवारों को न पूरा मुआवजा मिला और न रोजगार। ग्रामीणों का कहना है कि जब SECL को जमीन चाहिए होती है तो राजस्व विभाग से रिकॉर्ड तुरंत निकल आता है, लेकिन मुआवजा देने की बारी आती है तो “पत्रक नहीं मिला” कहकर लोगों को घुमाया जाता है।
भूमिहीनों पर सबसे बड़ा संकट — “अब बेघर करने की तैयारी”

सबसे गंभीर आरोप भूमिहीन परिवारों को लेकर लगाया गया है। जिन परिवारों ने शासकीय या दूसरे की जमीन पर वर्षों से मकान बनाकर जीवन बसाया था, उन्हें अब पुनर्वास और बसाहट के लिए अपात्र बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ प्रधानमंत्री Narendra Modi गरीब और भूमिहीनों के लिए आवास योजनाओं की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर SECL की नीति ऐसे परिवारों को बेघर करने का रास्ता बना रही है।
“राजस्व शिविर” भी निकले सिर्फ दिखावा
खोडरी, रिसदी और पड़नियां में लगाए गए शिविरों को ग्रामीणों ने “औपचारिकता” करार दिया है। आरोप है कि शिविरों में सिर्फ आवेदन जमा किए गए, लेकिन मौके पर कोई निराकरण नहीं हुआ। अंत में लोगों को फिर उसी तहसील कार्यालय भेज दिया गया, जहां भ्रष्टाचार से वे पहले ही परेशान हैं।
ड्रोन सर्वे पर बड़ा विवाद, मुआवजे में कटौती का आरोप -ग्रामीणों ने ड्रोन सर्वे को भी विवादों के घेरे में खड़ा कर दिया है। उनका आरोप है कि बिना सहमति और जानकारी के किए गए ड्रोन सर्वे को आधार बनाकर संपत्तियों का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिससे मुआवजे में भारी कटौती हो रही है।
ग्राम जटराज के ग्रामीणों ने तहसीलदार दर्री पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एक ही गांव में कुछ लोगों को “मसाहती” मानकर लाभ दिया जा रहा है और बाकी लोगों को अपात्र घोषित किया जा रहा है। इससे गांव में भारी आक्रोश है।आज कटघोरा में शक्ति प्रदर्शन भूविस्थापितों ने साफ कर दिया है कि अब केवल आवेदन और शिकायतों से काम नहीं चलेगा। कुसमुंडा क्षेत्र के अधिग्रहित गांवों के सैकड़ों ग्रामीण आज कटघोरा पहुंचकर SDM कार्यालय का घेराव करेंगे। प्रशासन ने भी स्थिति को देखते हुए अलर्ट मोड अपना लिया है।









